Live-in relationship neither a crime nor a sin: Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इल-रिलेशन को ना ही अपराध बताया और ना ही पाप। लेकिन कोर्ट ने साफ कहा है कि इस तरह के संबंधों में रह रही महिलाओं और उनसे जन्मे बच्चों की रक्षा के लिए कानून बनाए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इल-रिलेशन के एक मामले पर सुनवाई करते हुए इसकी एक नई परिभाषा गढ़ी।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दुर्भाग्य से सहजीवन को नियमित करने के लिए वैधानिक प्रावधान नहीं हैं। सहजीवन खत्म होने के बाद ये संबंध न तो विवाह की प्रकृति के होते हैं और न ही कानून में इन्हें मान्यता प्राप्त है। न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में सहजीवन को वैवाहिक संबंधों की प्रकति के दायरे में लाने के लिए दिशानिर्देश तय किए। Read More...
Source : Janoduniya.tv
Tags : Live-in relationship, Supreme Court, India News

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