भारतीय सिनेमा समय समय पर जासूसी आधारित फिल्मों पर हाथ साफ करता रहा है, भले ही जासूसी से जुड़ी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर अधिक सफलता नहीं मिली, शायद भारतीय सिने प्रेमी भारतीय फिल्मों में जेम्स ब्रांड सीरीज की गुणवत्ता को देखना चाहता है। एक था टाइगर, विनोद एजेंट के बाद अब बॉक्स ऑफिस पर निखिल आडवाणी जासूसी आधारित फिल्म डीडे लेकर पहुंचे हैं, जिसको स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान कई फिल्म निर्माता निर्देशकों और अभिनेताओं से वाहवाही मिली।
शायद हम इसको आमंत्रित का सम्मान कह सकते हैं। मगर कोई भी फिल्म सिने खिड़की पर तभी खरी उतर सकती है, यदि वे सिने प्रेमियों की कसौटी पर खरी उतरती है। डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने अपनी पिछली फिल्मों से हटकर सीक्रिट एजेंसी रॉ के काम को सत्ता में बैठे नेताओं के साथ जोड़कर दमदार ढंग से पेश किया है। निखिल ने बॉक्स ऑफिस का मोह छोड़कर कहानी को एक ही ट्रैक पर रखा है।
अपनी कहानी के चारों रॉ एजेंट को उन्होंने सुपर मैन की तरह पेश नहीं किया, बल्कि इनके ईमानदार चेहरे और इनकी टफ लाइफ पर ही अपना कैमरा फॉक्स किया है। फिल्म की कहानी दाऊद इब्राहिम से प्रेरित है, भले ही सिने जगत इस बात को नकारता रहे। दरअसल, फिल्म की कहानी रॉ और एक मोस्ट वांटेड अपराधी के आस पास घूमती है, जो कि पाकिस्तान में छुपा हुआ है। देश की एजेंसी रॉ को पक्की ख़बर मिलती है कि मोस्ट वांटेड अपराधी इरफान ‘ऋषि कपूर’ पाकिस्तान के एक शहर में छुपा बैठा है। रॉ इस अपराधी को उसके जुर्म की सजा देने के लिए एक गुप्त मिशन का खाका तैयार करता है।
इस मिशन की अगुवाई रॉ चीफ अश्विनी रॉय ‘नासिर’ करते हैं। रॉय के इस मिशन में वली खान ‘इरफान खान’, रुद्र प्रताप सिंह (अर्जुन रामपाल), जोया रहमान (हुमा कुरैशी) व असलम (आकाश दहिया) शामिल होते हैं। पुरानी बहुत सी फिल्मों की तरह यह लोग या तो अपराधी किस्म के हैं, या फिर सेना या अन्य किसी फोर्स से निकाले हुए। रॉ के यह लोग अपने ऑपरेशन में सफल होने से चूकते हैं, तो दो देशों के बीच तनाव बढ़ने लगता है। नेता लोग इन लोगों से करार कर लेते हैं, और इन लोगों को पकड़ने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां जुट जाती हैं। Read More...
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