Monday, 16 September 2013

क्या मोदी बन पाएंगे अगले वाजपेयी?

मई 2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ।
राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी की स्थिति हासिल करना आज के किसी भी नेता के लिए चुनौती हो सकती है। पूर्व प्रधानमंत्री को अजातशत्रु कहा जाता है। राजनीतिक विरोधी भी उनके कायल रहे हैं। बात को तर्कसंगत तरीके से तो वो रखते ही रहे हैं पर साथ ही साथ जनता से जोड़कर मुद्दे को लोकसंगत भी बना देते हैं वाजपेयी जी। अटल जी के राजनीतिक परिद्श्य से जाने के बाद से बीजेपी सत्ता में नहीं आ पाई है। हाल ही में पार्टी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और पार्टी के लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नामित किया है। तमाम जनमत सर्वेक्षण इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि भगवा पार्टी को सत्ता मिल सकती है। इसके पीछे मोदी की लोकप्रियता की ही दुहाई दी जा रही है।

पर्दे के पीछे से बीजेपी के नेता बारंबार दुहाई दे रहे हैं कि मोदी में भी वाजपेयी के गुण हैं। मोदी के धुर विरोधी इस बात से राय नहीं रखते। उनका मानना है कि मोदी पर दंगों का दाग है और वो सांप्रदायिक हैं। बीजेपी इस बात का जवाब ऐसे देती है कि 2002 के बाद से देश में कई दंगे हुए हैं और सियासी दलों ने उसका लाभ लेने की कोशिश की है। मोदी तो सुप्रीम कोर्ट तक से पाक साफ निकलकर आए हैं। बीजेपी का कहना है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में घटी सांप्रदायिक घटना को सत्ता पर आसीन पार्टी यानी सपा ने ही भड़कने का मौका दिया और एक संप्रदाय के पक्ष में काम किया। सियासी दलों में तमाम प्रहारों के बीच भी व्यक्ति आधारित सोच को देश में मौका मिला है। ऐसे ही दौर में बीजेपी भी आगे रखना चाहती है और मोदी को वाजपेयी सरीखा बताकर चुनाव जीतने को आमादा दिख रही है। आगे पढ़ें...

Source : Janoduniya.tv

Tags : नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी, गुजरात के मुख्यमंत्री, Narendra Modi, Atal Bihari Vajpayee

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