इस आसन में शरीर का आकार हल जैसा बनता है इसलिए इसको हलासन कहा जाता है।
प्रतिदिन 1 से 3 मिनट हलासन के अभ्यास से हम मोटापा और बवासीर को नियंत्रण
में रख सकते हैं।
हलासन से हम मेरूदंड (spine) को फ्लेक्सिबल बनाने के साथ-साथ बवासीर तथा मोटापे की बीमारी पर भी नियंत्रण रख सकते हैं। मेरूदंड फ्लेक्सिबल होने से हम दिन भर स्फूर्तिवान बने रहते हैं।
कैसे करें हलासन : भूमि पर बिछे हुए आसन पर चित्त होकर लेट जाएँ। दोनों हाथ शरीर को लगे रहें। अब सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ धीरे-धीरे ऊँचे करते जायें। नब्बे डिग्री पर जब दोनों पांव आ जाए तो सांस छोड़ते हुए अपनी कमर उठाएं। फिर पीछे सिर के तरफ झुकायें। पैर बिल्कुल तने हुए रखकर पंजे ज़मीन पर लगायें। ठोड़ी छाती से लगी रहे। शुरू-शुरू में दो-तीन मिनट से लेकर 10-15 मिनट तक समय की अवधि बढ़ा सकते हैं। आगे पढ़ें...
Source : janoduniya.tv
Tags : हलासन, योग, आसन, Yoga
हलासन से हम मेरूदंड (spine) को फ्लेक्सिबल बनाने के साथ-साथ बवासीर तथा मोटापे की बीमारी पर भी नियंत्रण रख सकते हैं। मेरूदंड फ्लेक्सिबल होने से हम दिन भर स्फूर्तिवान बने रहते हैं।
कैसे करें हलासन : भूमि पर बिछे हुए आसन पर चित्त होकर लेट जाएँ। दोनों हाथ शरीर को लगे रहें। अब सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ धीरे-धीरे ऊँचे करते जायें। नब्बे डिग्री पर जब दोनों पांव आ जाए तो सांस छोड़ते हुए अपनी कमर उठाएं। फिर पीछे सिर के तरफ झुकायें। पैर बिल्कुल तने हुए रखकर पंजे ज़मीन पर लगायें। ठोड़ी छाती से लगी रहे। शुरू-शुरू में दो-तीन मिनट से लेकर 10-15 मिनट तक समय की अवधि बढ़ा सकते हैं। आगे पढ़ें...
Source : janoduniya.tv
Tags : हलासन, योग, आसन, Yoga

No comments:
Post a Comment